कामायनी : जयशंकर प्रसाद द्वारा हिंदी पीडीऍफ़ पुस्तक – काव्य | Kamayani : Jayshankar Prasad Hindi PDF Book – Poetry (Kavya)

Book Name कामायनी / Kamayani
Author
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Language
Pages 308
Quality Good
Size 8 MB

पुस्तक का विवरण : है तो भी बड़ा ही भावमय और श्लाध्य है। यह मनुष्यता का मनोवैज्ञानिक इतिहास बनने में समर्थ हो सकता है। आज हम सत्य का अर्थ घटना कर लेते हैं। तब भी उसके तिथि-क्रम मात्र से सन्तुष्ट न होकर, मनोवैज्ञानिक अन्वेषण के द्वारा इतिहास की घटना के भीतर कुछ देखना चाहते हैं। उसके मूल में क्या रहस्य है ? आत्मा की अनुभूति………

Pustak Ka Vivaran : Hai to bhi bada hi bhavmay aur shladhy hai. Yah Manushyata ka Manovaigyanik itihas banane mein samarth ho sakata hai. Aaj ham saty ka arth ghatana kar lete hain. Tab bhi usake tithi-kram matr se santusht na hokar, manovaigyanik anveshan ke dvara itihas ki ghatana ke bheetar kuchh dekhana chahate hain. Uske mool mein kya rahasy hai ? Atma ki anubhooti………

Description about eBook : Even if it is, it is very emotional and scholarly. It may be capable of becoming a psychological history of humanity. Let the meaning of the truth happen today. Yet not satisfied with its date-order, psychologists seek to see something within the phenomenon of history through investigation. What is the secret in its origin ? Feeling of soul…..

“चरित्र को बनाए रखना आसान है, उसके भ्रष्ट हो जाने के बाद उसे सुधारना कठिन है।” ‐ टॉमस पेन (१७३७-१८०९), लेखक एवं राजनीतिक सिद्धांतकार
“Character is much easier kept than recovered.” ‐ Thomas Paine (1737-1809), Writer and Political Thinker

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5 thoughts on “कामायनी : जयशंकर प्रसाद द्वारा हिंदी पीडीऍफ़ पुस्तक – काव्य | Kamayani : Jayshankar Prasad Hindi PDF Book – Poetry (Kavya)”

  1. संयोग कि आपके इस साईट को देखने का अवसर मिला. अच्छा लगा. हमारा एक उपन्यास है, "पृष्ठांगन में प्रणय-उपवन"
    क्या आप इसे प्रकाशित करना चाहेंगे? अगर हाँ तो कृपया jainarayangaur@yahoo.com पर उत्तर देकर कृतार्थ करें.

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  2. मैंने श्रीमद्भगवद्गीता के श्लोकों का पद्यानुवाद किया है ।
    करीबन 600पेज की हस्तलिखित सामग्री है ।

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  3. मैंने श्रीमद्भगवद्गीता के श्लोकों का पद्यानुवाद किया है ।
    करीबन 600पेज की हस्तलिखित सामग्री है ।
    इसमें श्लोकों का विस्तार से भाष्य किया गया है ।

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