ग्राम्या : श्री सुमित्रानंदन पंत द्वारा हिंदी पीडीऍफ़ पुस्तक – काव्य | Gramya : by Shri Sumitranandan Pant Hindi PDF Book – Poetry (Kavya)

Book Name ग्राम्या / Gramya
Author
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Language
Pages 105
Quality Good
Size 3 MB
Download Status Available

पुस्तक का विवरण : ग्राम्या में मेरी युगवाणी के बाद की रचनाएँ संग्रहीत हैं । इनमें पाठकों को ग्रामीणों के प्रति  केवल बौद्धिक सहानुभूति ही मिल सकती है । ग्राम्य जीवन में मिलकर, उसके भीतर से, ये अवश्य नही लिखी गई है । ग्रामों की वर्तमान दशा में वैसा करना केवल प्रति क्रियात्मक साहित्य को जन्म देना होता । युग, संस्कृति आदि शब्द इन……..

Pustak Ka Vivaran : Gramya mein meri Yugavani ke bad ki Rachanayen sangraheet hain . Inamen pathakon ko grameenon ke prati keval bauddhik sahanubhooti hi mil sakati hai . gramy jeevan mein milkar, usake bheetar se, ye avashy nahi likhi gayi hai . Gramon ki vartaman dasha mein vaisa karana keval prati kriyatmak sahity ko janm dena hota . Yug, sanskrti aadi shabd in……..

Description about eBook : The works after my Yugavani are stored in Gramya. In this, readers can only get intellectual sympathy towards the villagers. It is not written from within, in rural life. Doing the same in the present condition of the villages would only give rise to the functional literature. Words like era, culture etc. ……..

“मैं आपको सफलता का सूत्र नहीं दे सकता हूं, लेकिन मैं आपको असफलता का सूत्र बता सकता हूं- जो इस प्रकार से है- हर व्यक्ति को खुश करने का प्रयास करना।” ‐ हर्बर्ट बेयार्ड स्वोप
“I cannot give you the formula for success, but I can give you the formula for failure–which is: Try to please everybody.” ‐ Herbert Bayard Swope

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