ध्यान : स्वामी ब्रह्मोशानंद द्वारा मुफ्त हिंदी पुस्तक | Dhyan : by Swami Brahmoshanand Free Hindi Book

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“मन जो स्नेह संजो सकता है उन में से सबसे पवित्र है किसी नौ वर्षीय का निश्छल प्रेम।” – होलमैन डे
“The purest affection the heart can hold is the honest love of a nine-year-old.” – Holman Day

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ध्यान : स्वामी ब्रह्मोशानंद द्वारा  मुफ्त हिंदी पुस्तक | Dhyan : by Swami Brahmoshanand Free Hindi Book 

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Dhyan-Swami-Brahmoshanand-ध्यान-स्वामी-ब्रह्मोशानंद

पुस्तक का नाम / Name of Book : ध्यान 

पुस्तक के लेखक / Author of Book : Swami Brahmoshanand

पुस्तक की भाषा / Language of Book : हिंदी 

Size of Ebook : 45 MB

कुल पन्ने / Total pages in ebook : 241

पुस्तक डाउनलोड स्थिति / Ebook Downloading Status  : Medium 

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पुस्तक का विवरण / Description about ebook : ध्यान के सिद्धांत एवं साधना का विस्तृत विवेचन प्रारंभ करने के पूर्व हमें उसकी पट्टभूमि और सन्दर्भ को समाज लेना चाहिए | ध्यान में सफलता का शांत जीवन का घनिष्ट सम्बन्ध है | सफलतापूर्वक ध्यान के लिए मन का शान्त होना आवश्यक है और मन की शान्ति के लिए दैनन्दिन जीवन की समग्र गतिविधियाँ शांतिपूर्वक समोंन की जानी चाहिए | कर्म में आराधना का भाव ध्यान में बहुत सहायक होता है | हम चाहे किसी भी कर्म में क्यों न लगे हों, हमे सर्वदा यह भाव बनाये रखना चाहिए की हम भगवान् के सानिध्य में हैं | तुम कह सकते हो की एसे कार्यों के बीच जहाँ पूरा मनोवेश आवश्यक है, यह कठिन है | यह बात मान भी ले तो तो भी यह भी सत्य है की ऐसे मनोवेश वाले कार्य के समाप्त होते ही हम अपना मन भगवान् में लगा सकते हैं|…………………



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One Quotation / एक उद्धरण
“ज़िंदगी तो कुल एक पीढ़ी भर की होती है, पर नेक काम पीढ़ी दर पीढ़ी चलता है।”
– अज्ञात
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“Life is for one generation; a good name is forever.” 

– Anonymous

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