बृज के भक्त (दूसरा भाग) : ए बी एल कपूर द्वारा मुफ्त हिंदी पीडीएफ पुस्तक | Brij Ke Bhakt (Part 2) : By A B L Kapoor Free Hindi Pdf Book

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“एक बार काम शुरू कर लें तो असफलता का डर नहीं रखें और न ही काम को छोड़ें। निष्ठा से काम करने वाले ही सबसे सुखी हैं।” ‐ चाणक्य
“Once you start a working on something, don’t be afraid of failure and don’t abandon it. People who work sincerely are the happiest.” ‐ Chanakya

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बृज के भक्त (दूसरा भाग) : ए बी एल कपूर द्वारा मुफ्त हिंदी पीडीएफ पुस्तक | Brij Ke Bhakt (Part 2) : By A B L Kapoor Free Hindi Pdf Book

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पुस्तक का नाम / Name of Book : बृज के भक्त (दूसरा भाग) /    Brij Ke Bhakt (Part 2) 

पुस्तक के लेखक / Author of Book :   ए बी एल कपूर / A B L Kapoor

पुस्तक की भाषा / Language of Book : हिंदी / Hindi

पुस्तक का आकर / Size of Ebook : 80 MB

कुल पन्ने / Total pages in ebook : 386

पुस्तक डाउनलोड स्थिति / Ebook Downloading Status  : Best

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पुस्तक का विवरण : बंग देश के बाँकुड़ा जिले के पुरुनियापाट के श्री रसिकानंद प्रभु के कनिष्ठ पुत्र श्री नंद्किशोरदास गोस्वामी श्रीश्रीमननित्यानन्द प्रभु की सातवीं पीढ़ी में थे | वे शेशव से ही विषय विरक्त थे | नित्यानन्द-संतान होने के नाते वैष्णव शिष्टाचार के अनुसार वैष्णव मात्र के पूज्य थे | छोटे-बड़े, गृहस्थ और त्यागी सब उसी दृष्टि से उनका आदर करते थे | पर यह उनके भाव के प्रतिकूल था | इससे उन्हें हार्दिक कष्ट होता था………….

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Description about eBook : Bang the Bakudha district Puruniapat Shri. Rasikanand Lord seventh youngest son of Lord Sri Nandkishordas Goswami was Srisrimannityanand. They were nonchalant from the topic since childhood. Being nityanand-child Vaishnava etiquette was sacred to the Vaishnava mere. Large and small, domestic and Solitaire was respected by all the terms. This was contrary to their sense. It pained him was hearty…………….

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One Quotation / एक उद्धरण
“बड़ा सोचें, जल्दी सोचें, आगे की सोचें। विचारों पर किसी का एकाधिकार नहीं है।”
– धीरूभाई अंबानी


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“Think big, think fast, think ahead. Ideas are no one’s monopoly.” 
– Dheerubhai Ambani

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