सदाचार का तावीज : हरिशंकर परसाई द्वारा हिंदी पीडीऍफ पुस्तक | Sadachar Ka Taveej : by Harishankar Parsai Hindi PDF Book

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पुस्तक का नाम / Name of Book : सदाचार का तावीज / Sadachar Ka Taveej

पुस्तक के लेखक / Author of Book : हरिशंकर परसाई / Harishankar Parsai
पुस्तक की भाषा / Language of Book : हिंदी / Hindi

पुस्तक का आकर / Size of Ebook : 2.6 MB

कुल पन्ने / Total pages in ebook : 160

पुस्तक डाउनलोड स्थिति / Ebook Downloading Status  : Best 
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पुस्तक का विवरण : सदाचार भला किसे प्रिय नहीं होता। सदाचार का तावीज़ बाँधते तो वे भी हैं जो सचमुच ‘आचारी’ होते हैं, और वे भी जो बाहर से ‘एक’ होकर भी भीतर से सदा ‘चार’ रहते हैं। यहाँ ध्यान देने की बात यही है कि आपके हाथों में प्रस्तुत सदाचार का तावीज़ किसी और का नहीं-हरिशंकर परसाई का है। परसाई-यानी सिर्फ परसाई और इसीलिए यह दावा करना गलत नहीं होगा कि सदाचार का तावीज़ भी हिन्दी के व्यंग्य-साहित्य में अपने प्रकार की अद्वितीय कृति है..............

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Description about eBook : Who does not love goodness? If you do the talisman of good conduct, then you are also those who are really 'Acharya', and those who are 'one' from outside and always remain 'four' from within. The point of note here is that the essence of virtue presented in your hands is not of anybody else-Harishankar is from Parasai. Parsai-that is, just a parasai and therefore it would not be wrong to claim that the virtue of virtuousness is also a unique masterpiece of Hindi satirical literature.................

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One Quotation / एक उद्धरण

“क्यों न हम वृद्धाश्रमों के बग़ल में ही अनाथालय बनाएं? कोई व्यक्ति झूलने वाली कुर्सी में बैठा होगा तो बहुत जल्दी ही उसकी गोद में एक बच्चा भी होगा।”
क्लोरिस लीचमैन

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“Why can't we build orphanages next to homes for the elderly? If someone were sitting in a rocker, it wouldn't be long before a kid will be in his lap.” 
Cloris Leachman






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