आँख की किरकिरी : रवीन्द्रनाथ टैगोर द्वारा हिंदी पीडीऍफ पुस्तक | Aankh Ki Kirkiri : by Ravindranath Tagore Hindi PDF Book


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पुस्तक का नाम / Name of Book : आँख की किरकिरी / Aankh Ki Kirkiri

पुस्तक के लेखक / Author of Book : रवीन्द्रनाथ टैगोर / Ravindranath Tagore

पुस्तक की भाषा / Language of Book : हिंदी / Hindi

पुस्तक का आकर / Size of Ebook : 19.8 MB

कुल पन्ने / Total pages in ebook : 289

पुस्तक डाउनलोड स्थिति / Ebook Downloading Status  : Best 
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पुस्तक का विवरण : मेरे साहित्यकी पथ-यात्राका पूर्वापर अनुसरण करनेसे यह बात तुरत पकडाई दे जायगी कि ‘अाँखकी किरकिरी’ उपन्यास आकस्मिक है, केवल मेरे अन्दर ही नही, उस दिनके बगला साहित्य-क्षेत्रमे भी। बाहरसे कौन-सा इशारा आया था मेरे मनमे, यह प्रश्न दुरूह है। सबसे सहज जवाब यह है कि धारावाहिक लम्बी कहानियोकी माँग मासिकपत्रोकी हमेशा की भूख थी और उस भूख की पूर्तिके लिए ‘वङ्गदर्शन’ मासिकपत्रने मेरा नाम दर्ज कर लिया था। मेरा उसमें प्रसन्न समर्थन नही था, और मनमें इस बातका काफी सकोच भी था कि किसी पूर्वतन ख्यातिका उत्तराधिकार ग्रहण करना एक सङ्कट मोल लेना है। किन्तु, मेरे मनमें उपरोधअनुरोधका जहाँ भी कही द्वन्द्र हुआ है वहाँ प्राय: मै विजय नही पा सका हूँ, और अबकी बार भी वही हुआ..............

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Description about eBook : Following the precaution of my literary trail, it will be immediately caught and captured that the novel 'novel' is casual, not only in me but also in the fields of literature of that day. What was the signal from the outset, in my mind, this question is obsolete. The most comfortable answer is that the serial long story demand magazine was always hungry and for the sake of that hunger, the 'Vangdarshan' magazine had entered my name. I did not have any favorable support in it, and it was quite possible that it was a good idea to have a reclaimed inheritance. But, in my mind, I have not been able to win conclusions everywhere, wherever there is any duality, and even now it has happened.................

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One Quotation / एक उद्धरण

“शुरू में वह कीजिए जो आवश्यक है, फिर वह जो संभव है और अचानक आप पाएंगे कि आप तो वह कर रहे हैं जो असंभव की श्रेणी में आता है।”
असीसी के संत फ़्रांसिस

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“Start by doing what's necessary; then do what's possible; and suddenly you are doing the impossible.” 
St. Francis of Assisi






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