रसीदी टिकट : अमृता प्रीतम द्वारा मुफ्त हिंदी पीडीऍफ़ पुस्तक | Rasidi Ticket : by Amrita Pritam Free Hindi PDF Book

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पुस्तक का नाम / Name of Book : रसीदी टिकट / Rasidi Ticket


पुस्तक के लेखक / Author of Book : अमृता प्रीतम / Amrita Pritam


पुस्तक की भाषा / Language of Book : हिंदी / Hindi


पुस्तक का आकर / Size of Ebook : 3.3 MB


कुल पन्ने / Total pages in ebook : 192


पुस्तक डाउनलोड स्थिति / Ebook Downloading Status  : Best 

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पुस्तक का विवरण : ज़िन्दगी के कई वे पल, जो वक़्त की कोख में जन्मे, और वक्त की क़ब्र में गिरे हुए, आज मेरे सामने खड़े हैं........

ये सब क़ब्रें कैसे खुल गईं ? और ये सब पल जीते-जागते क़ब्रों में से कैसे निकल आए ?

यह ज़रूर कयामत का दिन है.....

यह 1918 का क़ब्र में से निकला हुआ एक पल है- मेरे अस्तित्व से भी एक बरस पहले का। आज पहली बार देख रही हूं, पहले सिर्फ़ सुना था। 

मेरे मां-बाप दोनों पंचखंड भसोड़ के स्कूल में पढ़ाते थे। वहां के मुखिया बाबू तेजासिंह की बेटियां उनके विद्यार्थियों में थीं। इन बच्चियों को एक दिन न जाने क्या सूझी, दोनों ने मिलकर गुरुद्वारे में कीर्तन किया, प्रार्थना की, और प्रार्थना के अन्त में कह दिया, ‘दो जहानों के मालिक ! हमारे मास्टरजी के घर एक बच्ची बख्श दो।’

भरी सभा में पिताजी ने प्रार्थना के ये शब्द सुने, तो उन्हें मेरी होनेवाली मां पर गुस्सा आ गया। उन्होंने समझा कि उन बच्चियों ने उसकी रज़ामन्दी से यह प्रार्थना की है, पर मां को कुछ मालूम नहीं था। उन्हीं बच्चियों ने ही बाद में बताया कि हम राज बीवी से पूछतीं, तो वह शायद पुत्र की कामना करतीं, पर वे अपने मास्टरजी के घर लड़की चाहती हैं, अपनी ही तरह एक लड़की। 

यह पल अभी तक उसी तरह चुप है- कुदरत के भेद को होठों में बन्द करके हौले से मुस्कराता, पर कराहता, पर कहता कुछ नहीं। उन बच्चियों ने यह प्रार्थना क्यों की ? उनके किस विश्वास ने सुन ली ? मुझे कुछ मालूम, पर यह सच है कि साल के अन्दर राज बीवी ‘राज मां’ बन गईं..............


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Description about eBook : Many moments of life, born in the womb of the womb, and fell in the grave of time, are standing in front of me today ....

How did all these graves open? And how did these moments come out of live-living graves?

This is surely the day of doom .....

This is a moment out of the grave of 1918- one year before my being, Seeing for the first time today, I had just heard.

Both my parents used to teach Panchkand Bhosod School. The daughters of Babu Tejasinh were there in their students. What did these girls do not know one day, both of them performed kirtan in the gurus, prayed, and at the end of the prayer, said, 'Owners of two jewels!' Give a child to our master's house. '

When the father listened to these words of prayer in the meeting, he got angry with his mother. She understood that those girls have prayed to her consent, but mother did not know anything. Those same girls later told us that we would ask Raj Biwi, he would probably wish for the son, but he wants a girl in his master's house, a girl like himself.

This moment is still silent in the same way - it shines from the lips by turning off the distinction of nature, but does not say anything but says nothing. Why did those girls make this pray ? Which of her faith has been heard ? I know something, but it is true that within the year Raj Biwi became 'Raj Maa'..................


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कार्ल लेविस

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“If you don’t have confidence, you’ll always find a way not to win.”
Carl Lewis






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