गुलामगिरी : ज्योतिबा राव फुले द्वारा मुफ्त हिंदी पीडीऍफ़ पुस्तक | Gulamgiri : by Jyotiba Rao Phule Free Hindi PDF Book

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पुस्तक का नाम / Name of Book : गुलामगिरी / Gulamgiri


पुस्तक के लेखक / Author of Book : ज्योतिबा राव फुले / Jyotiba Rao Phule


पुस्तक की भाषा / Language of Book : हिंदी / Hindi


पुस्तक का आकर / Size of Ebook : 1.09 MB


कुल पन्ने / Total pages in ebook : 70


पुस्तक डाउनलोड स्थिति / Ebook Downloading Status  : Best 

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पुस्तक का विवरण : महात्मा जोतिबा फुले ऐसे महान विचारक, समाज सेवी तथा क्रांतिकारी कार्यकर्ता थे जिन्होंने भारतीय सामाजिक संरचना की जड़ता को ध्वस्त करने का काम किया। महिलाओं, दलितों एवं शूद्रों की अपमानजनक जीवन स्थिति में परिवर्तन लाने के लिए वे आजीवन संघर्षरत रहे। सन 1848 में उन्‍होंने पुणे में अछूतों के लिए पहला स्‍कूल खोला। यह भारत के ज्ञात इतिहास में अपनी तरह का पहला स्‍कूल था। इसी तरह सन 1857 में उन्होंने लड़कियों के लिए स्‍कूल खोला जो भारत में लड़कियों का पहला स्कूल हुआ। उस स्कूल में पढ़ाने के लिए कोई शिक्षक न मिलने पर जोतिबा फुले की पत्नी सावित्री आगे आईं। अपने इन क्रांतिकारी कार्यों की वजह से फुले और उनके सहयोगियों को तरह-तरह के कष्ट उठाने पड़े। उन्हें बार-बार घर बदलना पड़ा। फुले की हत्या करने की भी कोशिश की गई। पर वे अपनी राह पर डटे रहे। अपने इसी महान उद्देश्य को संस्थागत रूप देने के लिए जोतिबा फुले ने सन 1873 में महाराष्ट्र में सत्य शोधक समाज नामक संस्था का गठन किया। उनकी एक महत्वपूर्ण स्थापना यह भी थी कि महार, कुनबी, माली आदि शूद्र कही जानेवाली जातियाँ कभी क्षत्रिय थीं, जो जातिवादी षड्यंत्र का शिकार हो कर दलित कहलाईं.............


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Description about eBook : Mahatma Jyotiba Phule was such a great thinker, social worker and revolutionary activist who worked to demolish the inertia of Indian social structure. They are lifelong fighters to bring changes in the humiliating life situation of women, dalits and shudras. In 1848, he opened the first school for untouchables in Pune. This was the first school of its kind in India's known history. Similarly, in 1857, he opened a school for girls, which became the first girls school in India. Jitiba Phule's wife Savitri came forward when no teacher was available to teach at that school. Due to these revolutionary works, flowers and colleagues have to suffer various kinds of pain. They had to change the house repeatedly. Also tried to kill Phule But they kept on their way. In order to institutionalize its very purpose, Jyotiba Phule constituted a society called Satya Shodhak Samaj in Maharashtra in 1873. One of his important establishments was that the tribes going to be called Mahars, Kunbi, Mali etc. were once Kshatriyas, who became victims of caste conspiracy and called Dalits.................


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One Quotation / एक उद्धरण

“स्वास्थ्य की हानि होने पर न तो प्रेम, न ही सम्मान, न ही धन-दौलत और न ही बल द्वारा हृदय को खुशी मिल सकती है।”
जॉन गे

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“Nor love, not honour, wealth nor power, can give the heart a cheerful hour when health is lost. ”
John Gay






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